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नेमा_दर्पण द्वारा आयोजित ऑनलाइन लाइव प्रस्तुति के लिए आज मुझे #सुर्मिला_अलंकरण_सम्मान 2020 से सम्…

नेमा_दर्पण द्वारा आयोजित ऑनलाइन लाइव प्रस्तुति के लिए आज मुझे #सुर्मिला_अलंकरण_सम्मान 2020 से सम्मानित किया गया । मैं समस्त #नेमा_दर्पण के आदरणीय अग्रजों, नेमा वणिक समाज के प्रांतीय ऊर्जावान उपाध्यक्ष श्री प्रभुनारायण नेमा जी, मेरे पिता एवं मार्गदर्शक श्री मोहनलाल नेमा जी, वरिष्ठ साहित्यकार श्री नितिन जैन 'नाना' जी , छोटे भाई श्री ऋषभ स्थापक , गणराज वेलफेयर सोसायटी, कीर्तिश केयर फाउंडेशन एवं अन्य अभी बंधुओ का हृदय आभार प्रकट करता हूँ, जिन्होंने इस उपलब्धि के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से मेरा सहयोग किए । #हृदय_की_गहराइयों_से_धन्यवाद !! 😊

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आख़िर क्या हैं सुवर्णप्राशन ?

यह बालको में किये जाने वाले मुख़्य सोलह संस्कारो में से स्वास्थ्य की दृष्टि से एक बेहद महत्वपूर्ण संस्कार हैं , सुवर्णप्राशन संस्कार का उल्लेख काश्यप और सुश्रुत संहिता में मिलता हैं ! आधुनिक विज्ञान ने कई रोगो के लिए Vaccine निकाली , हमारे आचार्यो ने यहीं सिद्धांत हजारो वर्ष पूर्व सोच रख़ा था ! आचार्यो ने सभी प्रकार की व्याधियो से शरीर की रक्षा तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले एक दिव्य योग की ख़ोज की जिसे सुवर्णप्राशन कहा जाता हैं ! पुराने समय में माता -पिता अपने बच्चो के जन्म के पश्चात जीभ पर चाँदी या सोने की शलाका से ॐ लिख़ते थे , लेकिन अब यह संस्कार विलुप्त हो गया हैं ! सुवर्ण अर्थात सोना(Gold) और प्राशन का मतलब चटाना , सुवर्णप्राशन को स्वर्ण प्राशन या स्वर्ण बिंदु प्राशन के नाम से भी जाना जाता हैं ! सुवर्णप्राशन में प्रयुक्त औषधियां इसमें शुद्ध स्वर्ण भस्म , वचा (Acorus calamus) , ब्राम्ही (Bacopa monnieri ) शंखपुष्पी (Convolvulus pluricaulis) आंवला (phyllanthus emblica ) यष्टिमधु (Glycyrrhiza glabra ) गुडूची (Tinospora cordifolia) बहेड़ा (Terminalia bellirica ) शहद और शुद्ध गाय के घी (ब्राम्ही आदि औषधियो से संस्कारित ) को उपयोग में लाया जाता हैं ! कब व किनके लिए लाभप्रद हैं सुवर्णप्राशन संस्कार जन्म से लेकर 16 वर्ष तक की उम्र के बच्चो को सुवर्ण प्राशन दे सकते हैं सुवर्ण प्राशन 1 माह से लेकर 3 माह तक रोजाना दिया जा सकता हैं और उसके बाद हर पुष्य नक्षत्र (हर 27 दिन के बाद )के दिन दिया जा सकता हैं ! सुवर्णप्राशन प्रात:काल सुर्योदय से पूर्व ख़ाली पेट कराना चाहिए तथा इसके आधे घंटे बाद तक कुछ नहीं ख़ाना चाहिए ! पुष्य नक्षत्र - पुष्य का

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